Saturday, 30 December 2017

AK 002 एक करुण व्यथा


पिंजरे के पंछी रे तेरा दर्द ना जाने कोए
बाहर से तू खामोश रहे और भीतर भीतर रोए
तेरा दर्द ना जाने कोए

केह ना सके तू अपनी कहानी
तेरी भी पंछी क्या जिन्दगानी रे
विधि ने तेरी कथा लिखी
आंसू मैं कलम डुबोएं
तेरा दर्द ना जाने कोए

चुपके चुपके रोने वाले
रखना छुपा के दिल के छाले रे
ये पत्थर का देश है पगले
यहाँ कोई ना तेरा होए
तेरा दर्द न जाने कोए


No comments:

Post a Comment

जम्हूरीअत AK-019 20th May 2019 ik

जम्हूरीअत AK-019 20th May 2019 जम्हूरियत का नशा इस कदर हावी हुआ हर सख्स इंसानियत भूलकर हैवानी हुआ इस दौर मैं क्या होगा आगे मत पूछ म...